कोटा. । बैठक लेने के लिए मैं जयपुर से चलकर यहां तक आ गया और आप लोगों को घर से निकलने की फुर्सत नहीं मिली। इतने से ही समझ सकता हूं कि स्कूलों के क्या हाल होंगे। वहां तो कभी झांके भी नहीं होंगे। लगता है फटकार बिना आप लोगों का दिमाग ठिकाने नहीं आता।
रविवार को कलेक्ट्रेट के टैगौर हॉल में शिक्षा मंत्री समीक्षा बैठक लेने पहुंच गए, लेकिन जिम्मेदार अफसर नदारद थे। आखिरकार मंत्री ने अफसरों को फोन लगवाए और जमकर फटकारा।
शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को ही सर्कुलर जारी कर दिया था कि शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी रविवार सुबह साढ़े नौ बजे कोटा में समीक्षा बैठक लेंगे।
तय कार्यक्रम के मुताबिक मंत्री कोटा पहुंच भी गए। सुबह नौ बजे ही वह तैयार होकर अफसरों के बुलावे का इंतजार करने लगे, लेकिन साढ़े नौ बजे तक कोई खबर नहीं आई।
बैठक में शामिल होने के लिए विधायक संदीप शर्मा और प्रहलाद गुंजल भी सर्किट हाउस पहुंच गए तो पौने दस बजे मंत्री ने सीधे बैठक स्थल पर जाने का फैसला लिया।
ठीक दस बजे शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी टैगोर हॉल में थे, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी बैठक में मौजूद ही नहीं था। वहीं जिला पंचायत के सीईओ जुगल किशोर मीणा भी गायब थे। शिक्षा उपनिदेशक और डीईओ भी इधर-उधर घूम रहे थे।
कलक्टर को सुनाई खरी-खरी
मंत्री ने जब गिनती के अधिकारियों को देखा तो एक-एक के बारे में पूछने लगे। बैठक में मौजूद लोग आपाधापी में आला अफसरों को बुलाने के लिए फोन लगाने लगे तो मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने फटकार लगानी शुरू कर दी।
मंत्री ने जब गिनती के अधिकारियों को देखा तो एक-एक के बारे में पूछने लगे। बैठक में मौजूद लोग आपाधापी में आला अफसरों को बुलाने के लिए फोन लगाने लगे तो मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने फटकार लगानी शुरू कर दी।
मंत्री ने जिला कलक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर को फोन पर ही जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने छात्रों की आत्महत्या रोकने के लिए चल रही वर्कशॉप में होने की बात कही तो मंत्री ने पूछा कि आपके अलावा जिला प्रशासन में कोई और अधिकारी कोटा में तैनात नहीं है क्या। कम से कम उन्हें तो बैठक में शामिल होना चाहिए था।
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