जयपुर। प्रदेश में पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं की संख्या में लगातार
बढ़ोतरी हो रही है। वहीं सरकार जो भर्तियां निकाल रही हैं, उनमें भी बाहरी
प्रदेशों के युवा कब्जा जमा रहे हैं।
कारण, प्रदेश में बाहरी राज्यों के
युवाओं के लिए कोटा तय
नहीं हैं। अजा-जजा व अन्य वर्गों के आरक्षण के बाद सामान्य वर्ग के लिए बचे
पूरे पदों पर बाहरी राज्यों के युवा आवेदन कर सकते हैं। साथ ही नौकरी भी
पा सकते हैं। शिक्षक, एलडीसी व कर्मचारी वर्ग की अन्य नौकरियों में बाहरी
राज्यों के युवाओं का प्रतिशत 20-25 प्रतिशत तक है। जबकि पंजाब, हरियाणा,
मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि पड़ोसी राज्यों में बाहरी प्रदेशों का कोटा तय
किया हुआ है। यानी कि प्रदेश के सीमित युवा ही उन राज्यों में नौकरी कर पा
रहे हैं।
रीट 2017 में 9 लाख में से करीब 2.5 लाख पड़ोसी राज्यों के
11
फरवरी को आयोजित हुई तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती रीट 2017 में नौ लाख
अभ्यर्थी बैठे थे। इनमें से करीब 2.5 लाख युवा हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश
व अन्य राज्यों के थे। इन राज्यों के युवा नौकरी पाने के बाद अपने प्रदेश
की सीमा से जुड़े हुए जिलों में ही पोस्टिंग ले लेते हैं। हरियाणा के युवा
अलवर, पंजाब के गंगानगर जिलों व गांवों में जुगत से पोस्टिंग करवा लेते
हैं।
पंजाब-हरियाणा में 15 फीसदी पदों पर ही ले सकते हैं प्रवेश
प्रदेश
में बाहरी राज्यों के युवा को पूरी तरह से छूट है। जबकि पंजाब, हरियाणा,
मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश में बाहरी राज्यों के लोगों को सीमित पदों पर ही
प्रवेश दिया जा रहा है। पंजाब व हरियाणा में केवल 15 फीसदी पद बाहरी
राज्यों के तय हैं। शेष बचे 85 फीसदी पदों पर केवल संबंधित राज्य के युवाओं
के लिए ही आरक्षित हैं। अगर आवेदक का वर्तमान निवास संबंधित प्रदेश का
हुआ, मगर मूल निवास किसी अन्य राज्य का, तो भी उसे 15 फीसदी पदों तक ही
मौका दिया जा रहा है।
एमपी में पटवारी परीक्षा में बाहरी राज्यों के युवाओं का चयन नहीं
हाल
ही में मध्यप्रदेश में आयोजित हुई पटवारी परीक्षा में तो बाहरी राज्यों के
अभ्यर्थियों को मौका ही नहीं दिया गया। पटवारी की विज्ञप्ति में स्पष्ट कर
दिया गया कि केवल मध्यप्रदेश के मूल निवासी ही इस भर्ती में भाग ले सकते
हैं। वहीं अन्य भर्तियों में बाहरी राज्यों के युवा 25 साल की उम्र तक ही
भाग ले सकते हैं।
शिक्षा में भी कोटा तय
नौकरी के साथ शिक्षा में भी
पड़ोसी राज्यों ने बाहरी प्रदेशों के लिए कोटा तय कर रखा है। पीएचडी,
मेडीकल, इंजीनियरिंग सहित सभी पाठ्यक्रमों में बाहरी राज्यों व एनआरआई
छात्रों के लिए केवल 15 फीसदी सीटें ही हैं।
- अन्य राज्यों में वहां के लोकल अभ्यर्थियों को ज्यादा मौका दिया
जाता है। जबकि राजस्थान में यहां के बेरोजगारों के लिए मौके कम हैं। इसलिए
बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए सीमा तय होनी चाहिए।
उपेन यादव, राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ
- हमारे प्रदेश में हमें ही प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। प्रदेश में
बेरोजगारों की फौज है। फिर भी बाहर के लोग आकर नौकरी पा रहे हैं।
चित्रांश शर्मा, बेरोजगार अभ्यर्थी
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