अजमेर। देश में शिक्षा से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता। इससे केंद्र और
राज्य सरकार अच्छी तरह वाकिफ है, लेकिन हकीकत बेहद उलट है। लॉ कॉलेज में
प्रथम वर्ष के प्रवेश की अधिकतम आयु कितनी हो इसको लेकर सरकार और कॉलेज
शिक्षा निदेशालय को सरोकार नहीं है। पिछले साल दाखिलों में दिक्कतें के
बावजूद कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
प्रदेश के लॉ कॉलेज प्रतिवर्ष प्रथम वर्ष में विद्यार्थियों को प्रवेश
देते हैं। नियमानुसार प्रथम वर्ष के लिए स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थी फार्म
भर सकते हैं। दो वर्ष पूर्व बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी विधि पाठ्यक्रमों
में प्रवेश के लिए 30 साल आयु तय कर दी। देशभर में इसका जबरदस्त विरोध हुआ।
इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई। कोर्ट ने इसी साल 3 मार्च
2017 को उम्र सीमा पर रोक लगा दी। लेकिन तबसे लेकर अब असमंजस की स्थिति बनी
हुई है।
नहीं लिए जाते विद्यार्थियों से फार्म
कॉलेज की मानें तो बीसीआई की लीगल एज्यूकेशन कमेटी ने 30 साल की आयु
सीमा तय की है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट और बीसीआई ने
आयु सीमा को लेकर कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। लिहाजा प्रदेश के कॉलेज
शिक्षा निदेशालय ने भी पुरो नियम में कोई संशोधन नहीं किया है। इसके चलते
तय सीमा से अधिक आयु वाले विद्यार्थियों के लिए विधि शिक्षा प्राप्त करना
मुश्किल हो गया है।
परीक्षाओं-योजनाओं में होते जमा
आईएएस, आरएएस, नेट, जेईई मेन्स, जेईई एडवांस, गेट और अन्य
राष्ट्रीय-राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों विद्यार्थी फार्म
भरते हैं। उम्र सीमा, वांछित दस्तावेजों- डिग्री अथवा अन्य खामियों पर भी
संबंधित भर्ती/परीक्षा एजेंसी आवेदन स्वीकार करती हैं। बाद में नियमानुसार
कमियों-त्रुटिपूर्ण फार्म को निरस्त किया जाता है। यही प्रक्रिया सरकार की
हाउसिंग, जनकल्याण और अन्य योजनाओं में होती है। नागरिकों-विद्यार्थियों के
आवेदन के मूल अधिकार को बनाया रखा जाता है।
भर्तियों में बढ़ी आयु सीमा
राज्य सरकार ने हाल में
भर्तियों में अधिकतम आयु सीमा को बढ़ाकर 40 साल किया है। इसकी अधिसूचना भी
जारी हो चुकी है। प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों को नौकरियों के आवेदन में
इसका फायदा मिलेगा। लेकिन सरकार और उच्च शिक्षा विभाग लॉ कॉलेज के प्रथम
वर्ष की आयु सीमा संशोधित नहीं कर पाया है।
अधिकतम आयु सीमा का निर्धारण सरकार और निदेशालय स्तर पर होता है।
मौजूदा नियमों में कोई संशोधन होता है, तब ही अगले सत्र में उसकी पालना हो
सकती है। डॉ. डी. के. सिंह कार्यवाहक प्राचार्य लॉ कॉलेज
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