राज्य सरकार ने शिक्षक भर्ती एवं पात्रता परीक्षा (रीट) के आयोजन के
लिए नियम बना लिए हैं और परीक्षा कराने का जिम्मा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को
दिया है। 15 हजार पदों की भर्ती की राजनीतिक मंचों से घोष्ाणा के बाद इसी
माह औपचारिक रूप से आवेदन भी आमंत्रित किए जाने हैं। सरकार के राजस्थान
शिक्षक पात्रता परीक्षा (आरटेट) को खत्म कर रीट की शुरूआत की है, जिसमें
पिछले दो बार हुए आरटेट के योग्यताधारियों को भी मौका दिया जाएगा। भर्ती
में यदि आरटेट के अंकों के आधार पर आवेदन किया जाएगा तो अभ्यर्थी रीट की
मेरिट में शामिल हो सकता है।
हजारों अभ्यर्थियों के 75 प्रतिशत से ज्यादा
राज्य
में अब तक दो बार आरटेट हो चुकी है। आरटेट-2011 और 2012 में कुल 15,37,001
अभ्यर्थी बैठ चुके हैं। दोनों में 7,50,218 अभ्यर्थी पास हुए थे। इनमें
2,22,615 अभ्यर्थी ऎसे हैं जिनके परीक्षा में 60 प्रतिशत से अधिक अंक थे।
हजारों अभ्यर्थियों ने 75 से 85 प्रतिशत तक अंक प्राप्त किए। यही अभ्यर्थी
होने वाली रीट की मेरिट पर भारी पड़ेंगे।
इसलिए है खतरा
दरअसल,
रीट भी आरटेट के सिलेबस और पैटर्न पर ही होगी। इसमें 150 अंकों का पेपर
होना है जिसके आधार पर मेरिट बनेगी। आरटेट में भी 150 अंकों के पेपर हुए थे
जिनमें अभ्यर्थी 75 से 85 प्रतिशत तक अंक ला चुके हैं। अब आरटेट के
प्रमाणपत्रों को अहमियत मिलने से वे अभ्यर्थी प्रतियोगिता में शीष्ाü पर
रहेंगे। ऎसे में नए अभ्यर्थियों के लिए बेहद कम गंुजाइश रहेगी।
पेपर आउट की भी शिकायतें थीं
वष्ाü
2012 में हुई टेट में कुछ स्थानों पर परीक्षा पूर्व पेपर आउट होने की
शिकायतें आई थीं और प्रारम्भिक तौर पर कई जगह संदिग्धों की धरपकड़ भी हुई
थी। अकेले नागौर जिले में ही अधिकांश केंद्रों पर सैकड़ों अभ्यर्थियों के
75 से 80 प्रतिशत अंक आए थे।
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