बांसवाड़ा। शिक्षाविभाग में द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के लिए तबादलाें का दौर अभी थमा नहीं है। अब तक 6 सूचियां जारी होने के बाद भी 7वीं सूची फिर जारी हुई है। जिसमें शिक्षा उपनिदेशक ने 59 शिक्षकों के तबादले किए हैं। जिसमें कई शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें संशोधन करते हुए दूसरी स्कूल में नियुक्त किया है। पिछली 23 जून से लेकर अब तक किए गए सैकड़ों शिक्षकों के तबादलों के बाद स्कूलों में पढ़ाने की गणित एक तरह से गड़बड़ा गई है।
लेकिन समस्त तबादले निदेशक लेवल से होने की वजह से स्थानीय अधिकारी भी वैकल्पिक व्यवस्था में लगे हुए हैं। दूसरी ओर, अब तक के समस्त आदेशों को देखें तो 203 वरिष्ठ अध्यापकों के स्कूल बदल गए हैं। यानी लगभग 200 स्कूल केवल सेकंड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों से प्रभावित हुए हैं।
खासकर प्रिंसिपल और व्याख्याताओं के स्थानांतरण से ज्यादा प्रभाव सेकंड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों से पड़ा है। वहीं 10 जुलाई को उपनिदेशक जैन ने जिन 59 शिक्षकों के तबादले किए हैं, उन्हें 13 जुलाई तक स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करने के आदेश दिए। इस पर अधिकांश शिक्षकों ने नई जगह पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इसके पहले 6 सूचियां जारी हो चुकी थी। जिसमें 109 वरिष्ठ अध्यापकों के स्थानांतरण किए गए थे।
( शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश के अनुसार, कुछ आदेश अभी भी उपलब्ध नहीं।)
213 वरिष्ठ अध्यापक
प्रिंसिपल13
व्याख्याता18
शारीरिक शिक्षक 51
अन्य71
शिक्षक संगठन भी खफा
स्थानांतरण नीति कहती है कि समान अनुपात, एक सिस्टम के मुताबिक ट्रांसफर होने चाहिए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है। स्वाभाविक है कि तबादलों से स्कूल प्रभावित हो रहे हैं। स्टाफिंग पैटर्न से पद ही खत्म हो रहे हैं।- गोपेश उपाध्याय, जिलाध्यक्ष, शिक्षक संघ राष्ट्रीय
लगातार तबादलों से कहीं कहीं स्कूलों में गणित तो गड़बड़ाया है। इसका असर आने वाले दिनों में प्रतिनियुक्ति, शैक्षिक व्यवस्था के रूप में नजर आएगा। -अनिल व्यास, मंत्री, शिक्षक संघ सियाराम।
अभी वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई बात सामने नहीं आई है, लेकिन कहीं से ऐसी कोई बात आती है, तो देखा जाएगा। -केएल वैष्णव, एडिशनल डीईओ, शैक्षिक प्रकोष्ठ।
असर- विषय अध्यापक की समस्या आने लगी
स्कूलों में वरिष्ठ अध्यापकों के स्थानांतरण का असर यह देखा जा रहा है कि विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की समस्या आने लगी है। जो ट्रांसफर हुए हैं, उसमें से ज्यादा शिक्षक देहात से थे, जिन्हें शहर या कस्बे के आसपास लगाया है। ऐसे में स्कूलों में पढ़ाने के लिए विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। हालांकि अभी तक डीईओ कार्यालय में वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर तो कोई आदेश है और ही ऐसा कोई प्लान बना है।
इधर,स्टाफिंग पैटर्न से भी स्कूल प्रभावित
दूसरी ओर हाल ही में स्टाफिंग पैटर्न का कथित सिस्टम स्कूलों में लागू किया गया है। जिसमें स्कूलों में बच्चों की संख्या और शिक्षकों के अनुपात में पदों की कटौती की जा रही है। कटौती करने के लिए कोई नियम नहीं बना हुआ है। जैसे विभाग ने तय कर दिया कि जूनियर को हटाना है, तो जूनियर सही और सीनियर की डिमांड है, तो सीनियर को हटाया गया है। इसी तरह से पदों की कटौती से सब्जेक्ट टीचर के पद भी समाप्त हो रहे हैं। इसका असर आगे भी पढ़ाई पर पड़ सकता है।
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