जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की विवादित 2013 की भर्ती में नियुक्त शिक्षकों के खिलाफ जहां राजभवन की ओर से आदेश जारी कर कार्रवाई करने का दबाव बनाया जा रहा है, वहीं विश्वविद्यालय की रिसर्च बोर्ड ने इन शिक्षकों में से 6 शिक्षकों को पीएचडी स्कॉलर्स आवंटित करने की तैयारी कर ली है।
इस संबंध में दो दिन पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. राधेश्याम शर्मा की अध्यक्षता में हुई रिसर्च बोर्ड की बैठक में इन्हें रिसर्च सुपरवाइजर बनाने का निर्णय लिया गया है।
जेएनवीयू में वर्ष 2012-13 में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 154 पदों पर हुई भर्ती में अनियमितताओं की जांच के लिए राज्य सरकार ने 1 फरवरी 2017 को कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में कोटा विवि के कुलपति प्रो. पीके दशोरा के अलावा उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. धीरेंद्र देवर्षि, राजस्थान विवि के कुलसचिव देवेंद्र कुमार शर्मा, राजस्थान विवि के विधि विभाग के सह आचार्य डॉ. एसपीएस शेखावत और राजस्थान तकनीकी विवि कोटा के वित्त नियंत्रक डॉ. आरएल परसोया शामिल थे। कमेटी ने एक साल में जांच पूरी की और कुछ माह पूर्व रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी। उन्होंने इस रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि भी की। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार ने अपनी अनुशंसा के साथ राजभवन भेजी थी, जिस पर राजभवन ने गत माह कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय को दिशा-निर्देश दिए। राजभवन से मिले मार्गदर्शन के अनुसार नियमों को ताक पर रख जिनकी भर्ती हुई है, उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं इस अनियमितता को अंजाम देने में दोषी रहे एकेडमिक काउंसिल, सिंडिकेट व सलेक्शन कमेटी के सदस्यों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई के लिए भी कहा गया है। विश्वविद्यालय की ओर से इस संबंध एक तरफ कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है, वहीं कला व वाणिज्य संकाय की रिसर्च बोर्ड ने इनमें से 6 शिक्षकों को पीएचडी के रिसर्च सुपरवाइजर बनाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद कला संकाय के दो राजनीति विज्ञान विभाग में डॉ. शरद शेखावत व डॉ. नगेंद्रसिंह भाटी और वाणिज्य संकाय केे चार शिक्षकों बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में डॉ. उम्मेदराज तातेड़, डॉ. अाशा राठी, डॉ. मनीष वडेरा व डॉ. रमेश कुमार को स्कॉलर्स आवंटित करने की राह आसान हो गई है।
छह में से 4 की नियुक्ति इसीलिए संदेह के घेरे में
डाॅ. शरद शेखावत| पूर्व सिंडिकेट सदस्य प्रो. डूंगरसिंह खीची की भाभी।
डॉ. उम्मेद राज तातेड़| जेएनवीयू के प्रोफेसर एमसी तातेड़ के भाई।
डॉ. मनीष वडेरा| पूर्व प्रोफेसर डॉ. एमएल वडेरा के पुत्र।
डॉ. नगेंद्रसिंह भाटी| पूर्व प्रोफेसर डॉ. पीएस भाटी के पुत्र।
नौकरी है, तब तक काम तो करना होगा
राज्य सरकार की ओर से करवाई गई जांच में अनियमितताएं साबित हो चुकी है और राजभवन की ओर से नियमानुसार कार्रवाई के लिए कहा गया है। यदि कार्रवाई के दायरे में ये शिक्षक आएंगे तो स्कॉलर्स अन्य शिक्षकों को आवंटित कर दिए जाएंगे और जब तक नौकरी है, तब तक तो कार्य करना ही होगा। - प्रो. राधेश्याम शर्मा, कुलपति जेएनवीयू
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