कोटा. वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू)
शिक्षकों के पद खाली होने से नई मुसीबत में फंस गया है। यूजीसी ने
पूर्णकालिक शिक्षकों के बिना कोई पाठ्यक्रम न चलाने का निर्देश दिया है।
शिक्षकों के पद खाली होने से दस विषयों की पढ़ाई बंद करनी पड़ सकती है।
देशभर
के विश्वविद्यालयों को ओपन और डिस्टेंस मोड (ओडीएल) में पाठ्यक्रम संचालित
करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के डिस्टेंस एज्युकेशन
ब्यूरो (ड़ेब) से हर शैक्षणिक सत्र में अनुमति लेनी होती है।
इसके लिए विश्वविद्यालय एक शपथ पत्र देते हैं कि वह जिस विषय में
छात्रों को दाखिला दे रहे हैं, उसके शिक्षक नियुक्त है। डेब के नियमानुसार
जिस विषय का शिक्षक सेवानिवृत हो जाता है या नौकरी छोड़कर चला जाता है,
उसमें नए शैक्षणिक सत्र से दाखिला नहीं दिया जा सकता।
संचालन पर लटक सकती है तलवार
वीएमओयू मुख्यालय पर समाज शास्त्र,
मनोविज्ञान, विधि, गृह विज्ञान, उर्दू, इतिहास, राजस्थानी भाषा, हिंदी,
रसायन विज्ञान, और पुलिस स्टडीज विषय का एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं है। ऐसे
में डेब भौतिक सत्यापन कराता है तो बिना इन शिक्षकविहीन विषयों के चल रहे
स्नातक, स्नातकोत्तर, पीजी डिप्लोमा, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट प्रोग्राम के
संचालन पर भी तलवार लटक सकती है। जबकि आलम यह है कि मनोविज्ञान और पुलिस
स्टडीज विषयों में तो विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक शिक्षकों के पद सृजित
ही नहीं कर सका है।
बंद हो जाएगा विवि
यूजीसी के नए ओडीएल रेग्युलेशन के मुताबिक
डिस्टेंस और ओपन लर्निंग मोड में कोई भी पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए कम
से कम तीन स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है। लेकिन इस मानक
पर वीएमओयू का सिर्फ एक विभाग शिक्षा विद्यापीठ ही खरा उतरता है। जिसमें
चार शिक्षक कार्यरत हैं। बाकी कोई भी विषय नहीं है जिसमें न्यूनतम शिक्षकों
की तैनाती हो। यदि यूजीसी इस रेग्युलेशन की सख्ती से पालना कराती है तो
खुला विश्वविद्यालय को बंद ही करना पड़ेगा। यह हाल तब है जबकि विवि प्रशासन
जनवरी 2018 में राज्य सरकार को खाली पदों की जानकारी देने के साथ ही उन पर
नियुक्तियां शुरू करने के लिए भी पत्र लिख चुका है, लेकिन नौ महीने बाद भी
सरकार नियुक्तियों के बाबत कोई निर्देश जारी नहीं कर सकी। जिससे विवि की
मुसीबत और बढ़ गई है।
वीएमओयू की स्थिति
- शिक्षकों के कुल पद- 37
- खाली पद - 17
वर्जन -
- जिन विषयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं उन्हें भरने के लिए सरकार से
इजाजत मांगी थी, लेकिन अग्रिम निर्देश नहीं मिलने की वजह से कोई कार्रवाई
नहीं की जा सकी। वहीं जिन विषयों में पद सृजित नहीं है उनके लिए यूजीसी के
नियमानुसार राज्य सरकार से पद सृजित करने को पत्र लिखा है।
- प्रो. अशोक शर्मा, कुलपति, वीएमओयू
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