बांसवाड़ा. एक पखवाड़े पहले सामान्य सा दिखता राजकीय विद्यालय शिक्षकों
की एक पहल से ऐसा बदला कि शीतकालीन अवकाश के बाद बच्चे लौटे तो एकबारगी
अचंभित रह गए। इतना ही नहीं, विद्यालय का बदला स्वरूप देख भामाशाहों ने भी
अपनी धन की गठरी खोलकर सहयोग करना शुरू कर दिया। कुवैत में रोजगाररत
अप्रवासी भारतीयों ने भी मुक्त हस्त से सहयोग के लिए कदम बढ़ा दिए।
शीतकालीन अवकाश में बदलाव की नजीर बना है जिले का राजकीय माध्यमिक
विद्यालय जन्तोड़ा। चंद दिनों पहले 264 के नामांकन वाले इस विद्यालय भवन की
सपाट दीवारों पर अब नया रंगरोगन तो है ही, डोनाल्ड डक, डोरेमोन, शिनचेन,
मिकी माउस, टॉम एंड जैरी, मोटू-पतलू और छोटा भीम की पूरी टीम बच्चों को
आकर्षित कर रही है। शीतकालीन अवकाश के बाद सोमवार को स्कूल खुला, लेकिन
मंगलवार को भी स्थिति यह थी कि बच्चे दीवारों पर बने इन कार्टूनस को छूने
का लोभ संवरण नहीं कर पा रहे थे। खिडक़ी-दरवाजों पर अक्षर, स्वर-व्यंजन,
दीवारों पर राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान, प्रतिज्ञा, भारत और राजस्थान के
नक्शे सहित पीलरों पर विभिन्न खेलों के प्रतीक उकेरे हैं।
बदला नजारा देखकर चौंक गए बच्चे
शीतकालीन अवकाश खत्म होने के बाद स्कूल खुला तो यहां आने वाले गांव
जन्तोड़ा, बिलियाडूंगरी और भूदानपुर के बच्चे विद्यालय भवन का बदला रूप
देखकर चौंक गए। छात्रा रोनिका, चेतना, रवीना से बातचीत की तो वे भी फूली
नहीं समाई। छात्र हितेश पाटीदारने कहा कि अब हमारा स्कूल बदल गया है।
विश्वास है कि अगले वर्ष निजी स्कूल के बच्चे भी यहां प्रवेश लेंगे।
बोटनीकल गार्डन विकसित करने की मंशा
शिक्षकों ने बताया कि विद्यालय परिसर में काफी स्थान रिक्त है। यहां एक
हिस्से में बॉटनीकल गार्डन विकसित करने की मंशा है। इसके लिए स्टाफ
वअभिभावकों से चर्चा की जाएगी।
हाथोंहाथ फर्नीचर
वर्ष 2013 में क्रमोन्नत हुए इस विद्यालय के बदले स्वरूप का फोटो शिक्षक
चौहान ने फेसबुक पर पोस्ट किया तो गांव के भामाशाह भाणजी भाई ने कक्षा
सातवीं के लिए 24 सेट फर्नीचर पहुंचा दिए। कुवैत में रोजगाररत गांव के
युवाओं की समिति ने भी शिक्षकों से संपर्क कर कहा कि यहां कक्षा छह से
दसवीं तक के बच्चों के लिए फर्नीचर सहित अन्य सुविधाओं के लिए समिति धनराशि
देगी। समिति ने विद्यालय में कम्प्यूटर सेट दिया था।
शिक्षकों ने स्वयं दी राशि
कार्ययोजना को मूर्त रूप देने की पहल स्वयं शिक्षकों ने की।
संस्थाप्रधान ने सर्वाधिक दो हजार रुपए तो शेष शिक्षकों में किसी ने एक
हजार तो किसी ने डेढ़ हजार रुपए सहयोग राशि दी। इसमें नीरज जोशी, रवि
चौहान, सुभाषचंद्र जोशी, हरेंद्र शुक्ला, नरेश पाठक, शंकरलाल, गणेशलाल
पटेल, डूंगरलाल बरोड़, धनेश्वर, गोविंदसिंह राव शामिल थे। इसके बाद 27
दिसम्बर से विद्यालय का स्वरूप बदलने का काम शुरू हुआ, जो तीन जनवरी तक चला। इसमें चित्रकार हितेष वैष्णव का भी विशेष सहयोग रहा।
यूं बनी योजना
विद्यालय के संस्थाप्रधन देवकीनंदन झा और शारीरिक शिक्षक रवि चौहान ने
बताया कि शीतकालीन अवकाश शुरू होने के दो दिन पहले 22 दिसम्बर को मध्यावकाश
में स्टाफ के बीच बच्चों में निजी विद्यालयों के प्रति बढ़ते क्रेज पर
चर्चा हुई। यहां अध्ययनरत कुछ बच्चों के मन की बात जानी और सभी ने कुछ नया
करने की ठानी। चर्चा के दौरान ही कार्ययोजना बना दी गई।
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