माध्यमिक शिक्षा विभाग के मंडल कार्यालय उदयपुर में सोमवार को हुई अधिशेष
प्रधानाध्यापकों की काउंसलिंग के दौरान रिक्त पदों का पूरा खुलासा नहीं
करने पर टीएसपी क्षेत्र के शिक्षकों ने रोष जताया।
इसे लेकर शिक्षकों ने काउंसलिंग का बहिष्कार भी किया। बाद में शिक्षक
संगठनों के दबाव पर अधिकारियों ने बाद में ब्लॉकवार रिक्त पद बताकर
काउंसलिंग करवाई गई। इसके चलते बांसवाड़ा के सभी 18 अधिशेष प्रधानाध्यापकों
का अपने ब्लॉक में रिक्त सैकंडरी स्कूलों में पदस्थापन हुआ।
शिक्षक संघ राष्ट्रीय के अध्यक्ष गमीरचंद पाटीदार ने बताया कि संभागभर
के 85 प्रधानाध्यापकों के लिए सुबह प्रक्रिया शुरू होते ही बंद कमरे में
काउंसलिंग होने और बांसवाड़ा में कुशलगढ़ और गांगड़तलाई के केवल दो पद
रिक्त बताए जाने से शिक्षकों में असंतोष फैल गया। इसे संगठन ने भी गलत
बताया और क्षेत्रवार सभी रिक्त पदों काे प्रदर्शित करते हुए काउंसलिंग
करवाने की मांग कर नारेबाजी की। बाद में उपनिदेशक भरत मेहता से संगठन के
प्रतिनिधियों की वार्ता हुई। फिर ब्लॉकवार रिक्त पद बताने की बात मानी गई,
तो काउंसलिंग शुरू हुई।
शिक्षक सियाराम ने जयपुर से बनाया दबाव
शिक्षक संघ सियाराम के प्रदेश संयुक्त मंत्री अनिल व्यास ने बताया
कि उदयपुर में अंग्रेजी और संस्कृत के रिक्त पद नहीं दिखाने की शिकायत
उन्हें फोन पर कुछ शिक्षकों ने दी। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष सियाराम शर्मा
से बात की गई। शर्मा ने सीधे शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी को कॉल किया7
बाद में निर्देश पर उपनिदेशक मेहता ने संभाग के सभी रिक्त पदों के विकल्प
बताने शुरू किए।
उदयपुर में काउंसलिंग के दौरान रिक्त नहीं बताने से खफा होकर प्रदर्शन करते शिक्षक।
अब ऑनलाइन काउंसलिंग की उठी मांग
इधर काउंसलिंग की कमियां बताते हुए शिक्षक संघ राष्ट्रीय के नगर
उपशाखा के अध्यक्ष दिलीप पाठक, वनेश्वर गर्ग ,यज्ञदत्त जोशी, चुन्नीलाल
राठौड और आशीष त्रिवेदी ने अब ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने की मांग उठाई। इसे
लेकर शिक्षा मंत्री को भेजे ज्ञापन में पाठक ने बताया कि पारदर्शिता के लिए
सभी स्तरों के रिक्त पद दिखाना जरूरी है। मौजूदा प्रक्रिया जिला, संभाग व
राज्य स्तर पर हो रही है। इसके लिए पहुंचने में शिक्षकों को आने-जाने का
किराया, ठहरने,भोजन व जलपान पर 5000 से 500 रुपए तक खर्चा करने के साथ वक्त
जाया करना पड़ रहा है। सभी स्तरों पर काउंसलिंग घर बैठे आॅनलाइन होने पर
धन और समय की बचत होगी। बड़ी समस्या शहरों के आसपास के रिक्त पदों को पहले
नहीं बताने की है। बाद में चहेतों के संशोधन कर आसपास के रिक्त पदों पर
लगाया जाता रहा है। दूसरी ओर, दूरदराज के स्कूलों में रिक्त पद बताकर
विकल्प भरवाने पर मजबूरी में शिक्षक अपना स्कूल चयन करते हैं। इसके बाद भी
इन्हें पीएल का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है।
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