विभिन्न जिलों में कांट्रेक्ट पर कार्यरत व्यवसायिक शिक्षकों ने सोमवार को जयपुर स्थित शिक्षा संकुल मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान इनमें से सात शिक्षक संकुल परिसर मैं बनी पानी की टंकी पर चढ़ गए। इससे पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया तथा लगभग 2 घंटे बाद समझाइश कर इन शिक्षकों को उतारा गया।
व्यावसायिक शिक्षक संघ राजस्थान के बैनर तले आए लगभग 70 से अधिक शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा से मिलने का समय मांगा। मंत्री से मुलाकात नहीं होने पर शिक्षकों का समूह शिक्षा संकुल पहुंच गया और विरोध प्रदर्शन करने लगा। ये वहीं धरने पर बैठ गए। इस बीच इनमें से 7 शिक्षक संकुल परिसर में ही बनी पानी की टंकी पर चढ़ गए।
प्रदर्शन की सूचना मिलने पर पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने धरने पर बैठे शिक्षकों से समझाइश की, लेकिन वे नहीं माने। आपको बता दें पूरे प्रदेश के 905 सरकारी स्कूलों मैं कक्षा नवीं से 12वीं तक के स्कूली बच्चों को व्यवसायिक शिक्षा की विभिन्न ट्रेड में यह शिक्षक पढ़ाते हैं।

वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल ने की अतिरिक्त आयुक्त से मुलाकात
प्रदर्शन
कर रहे शिक्षकों में से 5 शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षा संकुल में
समग्र शिक्षा अभियान के अतिरिक्त आयुक्त भंवरलाल से मिलने पहुंचा। यहां
प्रतिनिधिमंडल ने 5 सूत्री मांगों का ज्ञापन पत्र सौंपा और जल्द से जल्द
शिक्षकों को वेतन दिलाने और 30 अप्रैल के बाद हटाए गए शिक्षकों को दोबारा
लगाने की मांग की।
वार्ता में अतिरिक्त आयुक्त ने जल्द शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक विचार कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। अतिरिक्त आयुक्त से मिले आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने धरने पर बैठे अन्य शिक्षकों से बातचीत कर धरना समाप्त करने का निर्णय किया। जिसके बाद टंकी पर चढ़े शिक्षकों को नीचे उतरने की बात कही।
इन मांगो को पूरा करने के लिए किया प्रदर्शन
- 30 अप्रैल बाद कांटेक्ट खत्म होने से बेरोजगार हुए सभी शिक्षकों को जल्द से जल्द विद्यालयों में वापस नियोजित किया जाए।
- आईटीआई गेस्ट फैकल्टी के प्रति जिस तरह सरकार ने संवेदनशील निर्णय करते हुए लॉक डाउन का पारिश्रमिक देने का निर्णय लिया उसी प्रकार हमें भी पारिश्रमिक दिलाया जाए।
- शिक्षकों का बकाया चल रहा 6 माह से अधिक का वेतन जल्द से जल्द कांट्रेक्टर के जरिए दिलाया जाए और भविष्य में ऐसी ठोस नीति बनाई जाए ताकि हमें समय पर वेतन मिल सके।
- 5 साल से राजकीय विद्यालयों में हम सेवाएं दे रहे हैं हमें भी संविदा कर्मी मानते हुए नियमितीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
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