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तलाक व विकलांग प्रमाण पत्र जांच में फर्जी, सीईओ ने जांच रिपोर्ट दबा दी

बाड़मेर.शिक्षक भर्ती परीक्षा 2012 में फर्जी तरीके से विकलांग और तलाक प्रमाण पत्र पेश कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाली शिक्षिका तारा चौधरी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही को लेकर ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग (पंचायती राज प्रा. शिक्षा) के उपायुक्त ने आदेश दिए थे, लेकिन इस आदेश पर बाड़मेर जिला परिषद सीईओ एमएल नेहरा की मनमर्जी भारी पड़ती नजर आ रही है।

आदेश के एक साल बाद भी शिक्षिका के खिलाफ कार्यवाही करने की बजाय सीईओ जांच रिपोर्ट को दबाकर बैठे है। जबकि मामले की शिकायत कई बार जनसुनवाई में भी की गई, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। जबकि शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की जांच में शिक्षिका की ओर से पेश किए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं और उसे दोषी माना गया है।
यह है मामला- तलाक देकर पत्नी को टीचर बनाने का खेल
पुलिस कांस्टेबल प्रभुलाल गोरसिया दर्जियों की ढाणी बायतु ने अपनी पत्नी तारा चौधरी को टीचर बनाने के लिए फर्जी दस्तावेज से शिक्षक भर्ती परीक्षा 2012 में दाखिला करवाया और तलाक तथा विकलांग प्रमाण पत्र से नौकरी भी हासिल कर ली। 16 सितंबर 2013 को अनाणी पुरोहितों की ढाणी चूली बाड़मेर में कार्यग्रहण भी कर लिया।
ओबीसी महिला परित्यक्ता एवं विकलांग श्रेणी से हासिल की गई नौकरी की शिकायत पर जब जांच शुरू हुई शिक्षिका और पति कांस्टेबल के पैरों तले जमीन खिसकने लगी। जांच रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेजों का खुलासा हुआ है। भास्कर के पास है फर्जी तरीके से शिक्षक बनने के कारनामों की जांच रिपोर्ट...
तहसीलदार, सीएमएचओ की जांच में फर्जी निकले दस्तावेज
अस्थाई विकलांग पत्र मान्य नहीं
6 जनवरी 2015 को प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ने लिखा कि तारा चौधरी द्वारा पेश विकलांग प्रमाण-पत्र सरकारी अस्पताल से जारी नहीं है। 6 अप्रैल 2015 को सीएमएचओ बाड़मेर ने शिक्षा विभाग को लिखा कि सीएचसी बायतु द्वारा अस्थाई विकलांग प्रमाण पत्र जारी किया गया, जो मान्य नहीं है। इसे जारी करने के लिए अस्थि रोग विशेषज्ञ या मेडिकल बोर्ड ही समक्ष है। ऐसे में तारा चौधरी इस परीक्ष में विकलांग के आधार पर पात्र नहीं थी।
पति-पत्नी में तलाक नहीं
तलाक प्रमाण पत्र के अनुसार तारा का अपने पति प्रभुराम गोरसिया से पारिवारिक न्यायालय जोधपुर द्वारा दीवानी मूलवाद में 12 अक्टूबर 2006 को सहमति से तलाक हुआ है। बाड़मेर एसपी के पत्र 3569 में 7 अक्टूबर 2014 के अनुसार पुलिस लाइन बाड़मेर में प्रभुराम पुत्र मंगनाराम को आवंटित राजकीय आवास संख्या डी-2 में 15 अक्टूबर 2009 से उसकी धर्मपत्नी तारा देवी, स्वयं के दो पुत्रों तथा एक भतीजी के साथ रह रहे हैं।
लिपिक से बनाया ओबीसी प्रमाण पत्र
30 मार्च 2012 को ओबीसी प्रमाण पत्र तहसीलदार बाड़मेर द्वारा जारी करना बताया गया। जांच में ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करते समय किसी प्रकार के दस्तावेज समर्थन में नहीं लिए जाना सामने आया। केवल अणदाराम की पहचान पर स्व. विवेक के आधार पर जारी किया जाना बताया। जबकि अाय के कोई दस्तावेज नहीं लिए गए। लिपिक की पहचान के आधार पर नोन क्रिमीलेयर का अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र जारी किया गया, जो संदेहजनक है।
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