स्कूलों में समय बढ़ोतरी न्यू स्टाफिंग पैटर्न पर शिक्षकों ने जताया रोष
बांसवाड़ा| राजस्थानशिक्षा एवं शिक्षक बचाओ संयुक्त मोर्चा की बैठक उपाध्याय पार्क में हुई। इसमें शिक्षकों ने स्कूलों के समय में की गई बढ़ोतरी और शिक्षा विभाग में न्यू स्टाफिंग पैटर्न के नाम पर शिक्षकों के पदों में की जा रही कटौती को लेकर आक्रोश जताया गया। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री लक्ष्मी नारायणसिंह ने बताया कि बैठक में इसी सत्र से स्कूलों के समय में की गई बढ़ोतरी को अव्यवहारिक और अनावश्यक बताया गया। बताया गया कि नया समय शिक्षा के अधिकार कानून में निर्धारित सीमा केंद्रीय विद्यालयों की समय अवधि से भी अधिक है। ऐसे में यह शिक्षकों के लिए असंगत होने के साथ ही बाल मनोविज्ञान के भी विपरीत है।
इसको देखते हुए स्कूलों में समय बढ़ोतरी के आदेश को निरस्त कर पूर्ववत समय ही रखने की मांग की गई। न्यू स्टाफिंग पैटर्न के नाम पर भी शिक्षकों के पदों में कटौती किए जाने से पदोन्नति नई भर्ती के अवसर समाप्त हो गए हैं। साथ ही शिक्षा में पीपीपी मोड लागू किए जाने से निजीकरण और व्यवसायीकरण बढ़ेगा, जिसे देखते हुए इस पर भी रोक लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही बैठक में शिक्षकों के 7 सूत्री मांग पत्र पर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन भी किया।
बांसवाड़ा| राजस्थानशिक्षा एवं शिक्षक बचाओ संयुक्त मोर्चा की बैठक उपाध्याय पार्क में हुई। इसमें शिक्षकों ने स्कूलों के समय में की गई बढ़ोतरी और शिक्षा विभाग में न्यू स्टाफिंग पैटर्न के नाम पर शिक्षकों के पदों में की जा रही कटौती को लेकर आक्रोश जताया गया। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री लक्ष्मी नारायणसिंह ने बताया कि बैठक में इसी सत्र से स्कूलों के समय में की गई बढ़ोतरी को अव्यवहारिक और अनावश्यक बताया गया। बताया गया कि नया समय शिक्षा के अधिकार कानून में निर्धारित सीमा केंद्रीय विद्यालयों की समय अवधि से भी अधिक है। ऐसे में यह शिक्षकों के लिए असंगत होने के साथ ही बाल मनोविज्ञान के भी विपरीत है।
इसको देखते हुए स्कूलों में समय बढ़ोतरी के आदेश को निरस्त कर पूर्ववत समय ही रखने की मांग की गई। न्यू स्टाफिंग पैटर्न के नाम पर भी शिक्षकों के पदों में कटौती किए जाने से पदोन्नति नई भर्ती के अवसर समाप्त हो गए हैं। साथ ही शिक्षा में पीपीपी मोड लागू किए जाने से निजीकरण और व्यवसायीकरण बढ़ेगा, जिसे देखते हुए इस पर भी रोक लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही बैठक में शिक्षकों के 7 सूत्री मांग पत्र पर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन भी किया।
ज्ञापन देने जाते राजस्थान शिक्षा शिक्षक बचाओ संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी।
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