लोकतंत्र में जनता ही असल शक्ति
है। जो भी पार्टी इसे मूलमंत्र के रूप में लेती है उसे सफलता मिलना
निश्चित है। इस सिद्धांत पर अमल करना ही सफलता है। राजस्थान बेरोजगार
एकीकृत महासंघ के बैनर तले बेरोजगारों की माँगो को लेकर आज विधानसभा के
सामने ज्योति नगर टी पॉइंट पर बेरोजगार महासभा आयोजित हुई।
बेरोजगारों की 4
सूत्रीय मांगों को लेकर बेरोजगार महासभा में सैकड़ों बेरोजगारों ने
विधानसभा को साक्षी मानते हुए भाजपा मुक्त राजस्थान करने की और गांव-गांव व
घर-घर जाकर भाजपा के खिलाफ प्रचार करने की और वोट नहीं देने की शपथ ली।
सरकारों को बनना पड़ता हैं जनता के कोप का भाजन...
भारतीय
राजनीति का अपना ही चरित्र है। यदि सरकारें लोक कल्याणकारी कार्यों को
अंजाम देती हैं तो उन्हें जनता की ओर से समर्थन भी मिलता है। इसे हम
प्रो-इनकम्बैंसी कहते हैं। साथ ही जनहितों को ताक पर रखने वाली सरकारों को
जनता के कोप का भाजन भी बनना पड़ता है। इसे हम एंटी- इनकम्बैंसी कहते हैं।
हम आंकड़ों के आधार पर ये कह सकते हैं कि अधिकांश भाजपा शासित प्रदेशों में
सरकारें पुन: चुनी जाती हैं।
वादों को पूरा करे सरकार...
लोगों में असंतोष की
भावना आती है। ये सब कुछ काफी हद तक सही भी हो सकता है, यदि कोई भी
राजनीतिक दल लोगों के हितों को सर्वोपरि रखेगा तो उसे चुनौतियों को अवसरों
में बदला जा सकता है। ये बात स्पष्ट है कि राजनीतिक दल जो भी वादे आम जनता
से करते हैं उन्हें पूरा किया जाना चाहिए। क्योंकि वादों को पूरे किए बिना
लोगों के बीच में जाने से राजनीतिक दल को पलटवार का सामना भी करना पड़ता
है।
बेरोजगारों ने रखी ये मांगे...
रीट शिक्षक भर्ती
2018 में b.a. में वेटेज 30% की जगह 10% या 5% किया जाए। राजस्थान की
भर्तियों में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों का कोटा
50% की जगह 5% किया जाए MP हरियाणा पंजाब छत्तीसगढ़ की तर्ज पर रखा जाए,
जिससे राजस्थान के बेरोजगारों को ज्यादा से ज्यादा मौका मिल सके। प्रतिबंध
जिलों को छोड़कर एक अभ्यर्थी को एक बार प्रमाण पत्र का लाभ दिया जाए यानी
एक प्रमाणपत्र से अध्यापक बन जाए तो उसे दोबारा उस प्रमाणपत्र से अध्यापक
नहीं बनाया जाए जिससे अन्य बेरोजगारों को और मौका मिलेगा। पंचायत राज
एलडीसी भर्ती 2013 की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करके
अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। बजट में घोषणा की गई भर्तियों की
विज्ञप्ति जल्दी-जल्दी जारी की जाए।