अलवर. गैर सरकारी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण करने में शिक्षा विभाग
पूरी तरह विफल रहा है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा देने का कार्य
व्यक्तिगत नही हो सकता। यह कार्य कोई निजी लाभ नहीं देखने वाली संस्था ही
कर सकती है।
ऐसे में सरकार को फीस पर नियंत्रण का कानून प्रभावी बनाना
चाहिए जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके। इस बारे में अभिभावकों ने अपनी
प्रतिक्रिया इस प्रकार व्यक्त की।
सरकार ही नहीं चाहती
राज्य सरकार प्राइवेट स्कूलों के दवाब में आकर काम कर रही है इसके कारण
यह हो रहा है। यदि कोई प्राइवेट स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों को नहीं
मानता है तो उनकी मान्यता निरस्त कर देनी चाहिए।
कमलेश सिंघल, एडवोकेट, अध्यक्ष अभिभावक संघर्ष समिति, अलवर
दिल्ली सरकार से सबक लीजिए
दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कानून
बनाया है। राजस्थान की सरकार को दिल्ली की सरकार से सबक लेना चाहिए।
शालिनी सोनी, अभिभावक, अलवर
कानून प्रभावी बनाए
शिक्षा विभाग को प्राइवेट स्कूलों पर नियंत्रण का कानून तो बना दिया गया
है।गैर सरकारी स्कूलों पर नियंत्रण का कानून बहुत अच्छा है लेकिन इसे
प्रभावी बनाने का कार्य तो विभाग का है। इस मामले में कठोर रवैया अपनाना
होगा।
पंकज शर्मा, एडवोकेट, अलवर
शिक्षा विभाग की उदासीनता
शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण फीस अधिनियम प्रभावी नहीं हो रहा
है।विभाग ने एक बार भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। कई बार शिकायत की गई
लेकिन शिक्षा विभाग ने उन्हे नोटिस तक नहीं दिए।
दीप्ती शर्मा, अभिभावक, अलवर
यह कोई व्यवसाय नहीं
निजी स्कूलों पर सरकार को नियंत्रण करना होगा। शिक्षा विभाग के
अधिकारियों को अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए। यह कैसे हो सकता है, इसका
जवाब विभाग को स्वयं को देना होगा।
सारिका, अभिभावक, अलवर
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विरोध प्रदर्शन किया
अलवर. एबीवीपी की ओर से गौरी देवी महिला महाविद्यालय में सीटें बढ़ाने
की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। छात्र संघ अध्यक्ष लता भोजवानी
ने बताया कि इसके बाद प्राचार्य को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।