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(रीट) से तीन दिन पहले ही वीक्षकों की ड्यूटी सूचियां वायरल

जिले में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से रविवार को आयोजित होने वाली राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) से तीन दिन पहले ही वीक्षकों की ड्यूटी सूचियां वायरल हो गई। रेंडमाइजेशन से ड्यूटी लगाने का दावा करने वाले शिक्षा विभाग की गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल होने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में रविवार को 31 सेंटरों पर 20073 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे।
कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी की बैठक में 7 फरवरी को वीक्षकों की सूचियां तैयार की गई। 8 फरवरी को ही सभी वीक्षकों की ड्यूटी सूचियां वाट्सएप पर वायरल हुई। इतना ही नहीं सूची के साथ वीक्षक के मोबाइल नंबर और किस स्कूल में कार्यरत है इसकी पूरी जानकारी है। जानकारी आउट होने के बाद कई परीक्षार्थी सीधे वीक्षकों से संपर्क करने में जुट गए। इधर, कई दलाल सक्रिय हुए है जो परीक्षार्थियों से दो से तीन लाख रुपए में पूरा प्रश्न पत्र हल करवाने का दावा कर रहे हैं।

जिला स्तरीय कमेटी ने 7 फरवरी को जारी की वीक्षकों की सूचियां, अगले दिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीक्षकों की मोबाइल नंबर समेत पूरी सूचियां

प्रशासन का तर्क : वीक्षकों को ट्रेनिंग में बुलाने के लिए जारी की सूचियां

बड़ी लापरवाही: जिले के 31 सेंटरों पर 20 हजार परीक्षार्थी शिक्षक बनने के लिए परीक्षा देंगे। सिस्टम की लापरवाही से पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने को तैयार 20 हजार परीक्षार्थियों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है।

सभी 31 केंद्रों के वीक्षकों की ड्यूटी सूचियां वायरल, दलालों का दो से तीन लाख रुपए में पेपर हल करवाने का दावा

सर, प्लीज हेल्प करना मेरा रिश्तेदार है |वीक्षकों के मोबाइल नंबर की सूचियां वायरल होने के बाद दबाव इस कदर बढ़ा हैं कि कई वीक्षकों के पास दिन में 50 से 60 लोगों के फोन आ रहे हैं। हर कोई बोल रहा है कि सर, मेरा भतीज, भाई व प|ी है। वह पढ़ाई में वैसे होशियार है आपकों तो सिर्फ दो-चार सवालों के उत्तर बताने हैं। भास्कर को कई वीक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि परीक्षार्थी व उनके परिजन लगातार सिफारिशें कर रहे हैं। इतना ही नहीं कई लोग तो उनके घर पहुंचकर परीक्षा में सहयोग करने की मन्नते कर रहे हैं।

खबर का मकसद अभ्यर्थियों में भय उत्पन्न करना नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग की खामी उजागर करना है,सफलता उन्हें ही मिलेगी जिन्होंने मेहनत की है

दलालों का झूठा दावा

2 से 3 लाख रुपए दो और पूरा प्रश्न पत्र हल करवा देंगे

कई दलाल तो पूरा प्रश्न पत्र हल करवाने का दावा कर रहे हैं। दलाल लगातार परीक्षार्थियों के संपर्क में हैं। उनका कहना हैं कि परीक्षा से पहले राशि जमा करवा दो और आप परीक्षा देने पहुंच जाए बाकी व्यवस्था उनके जिम्मे हैं। इस संबंध में परीक्षार्थी खेतदान व हेमाराम ने भास्कर को बताया कि रीट परीक्षा का प्रश्न पत्र हल करवाने की शर्त पर उन्होंने एक दलाल को पैसे भी दे दिए।

ये चार सवाल जो प्रशासन से मांगते हैं जवाब

.-रीट परीक्षा से पहले ही वीक्षकों की सूचियां कैसे हुई वायरल?

.-सेंटरवार वीक्षकों की मोबाइल नंबर समेत जानकारी क्यों दी गई?

.-परीक्षार्थी व वीक्षक सांठ-गांठ करें तो कार्रवाई का क्या सिस्टम है?

.-इतनी गंभीर लापरवाही के खुलासे के बाद वीक्षकों के सेंटर क्यूं नहीं बदले?

कोई भी परीक्षा में वीक्षकों की सूचियां गोपनीय ही रहती है। सेंटर पर ट्रेनिंग के लिए बुलाने की सूचना सिर्फ वीक्षक या केंद्राधीक्षक के पास रहती है। इससे किसी को यह पता नहीं चलता है कि कौनसे सेंटर पर किस वीक्षक की ड्यूटी हैं। हर साल होने वाली परीक्षाओं में ऐसा ही सिस्टम होता है। परीक्षा से पहले वाट्सएप पर वीक्षकों की सूचियां आउट होने का पहली बार मामला सामने आया है। इससे परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होना लाजमी है। धनराज जोशी, पूर्व सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी।

रीट परीक्षा शिक्षा विभाग आयोजित करवा रहा है, लेकिन मॉनिटरिंग व वीक्षकों की ड्यूटी लगाने का काम कमेटी के माध्यम से किया गया है। वीक्षकों की सूचियां आउट होने से कुछ नहीं होता है। अगर किसी ने अपना जमीर बेच रखा है तो वो ही नकल या अन्य अनुचित सहयोग कर सकता है। हालांकि इसको गंभीरता से लिया जा रहा है। ओमप्रकाश शर्मा, डीईओ, माध्यमिक शिक्षा

परीक्षा से पहले सूचियां आउट होना पारदर्शिता पर सवाल है

कोई भी परीक्षा में वीक्षकों की सूचियां गोपनीय ही रहती है। सेंटर पर ट्रेनिंग के लिए बुलाने की सूचना सिर्फ वीक्षक या केंद्राधीक्षक के पास रहती है। इससे किसी को यह पता नहीं चलता है कि कौनसे सेंटर पर किस वीक्षक की ड्यूटी हैं। हर साल होने वाली परीक्षाओं में ऐसा ही सिस्टम होता है। परीक्षा से पहले वाट्सएप पर वीक्षकों की सूचियां आउट होने का पहली बार मामला सामने आया है। इससे परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होना लाजमी है। धनराज जोशी, पूर्व सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी।

वीक्षकों के प्रशिक्षण के लिहाज से वीक्षकों की सूचियां तैयार की गई थी। रेंडमाइजेशन से ही सभी वीक्षकों की ड्यूटी लगाई है। अगर इसका कहीं पर दुरुपयोग होता है तो सख्त कार्रवाई करेंगे। सभी सेंटरों पर सीसीटीवी के अलावा विडियोग्राफी की व्यवस्था की गई है। परीक्षार्थी भरोसा रखें कहीं पर नकल नहीं होने दी जाएगी। शिवप्रसाद मदन नकाते, कलेक्टर

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